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Wednesday, April 14, 2021
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पश्चिम बंगाल चुनाव में असदुद्दीन ओवैसी के नहीं उतरने से ममता बनर्जी को फायदा होगा या बीजेपी को?

पश्चिम बंगाल में ज्यों-ज्यों चुनाव की तारीखें पास आती जा रही हैं सियासी मुकाबला और रोचक होता जा रहा है. राज्य में बीजेपी और टीएमसी की लड़ाई को त्रिकोणीय बनाने में लगे कांग्रेस-वाम गठबंधन के बीच एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने बंगाल के सियासी मैदान में ना उतरने का फैसला किया है. बिहार विधानसभा चुनाव में पांच सीटें जीतकर पॉलिटिकल पंडितों को चौंकाने वाले ओवैसी के इस कदम ने लोगों को जरूर हैरान किया है.

ऐसे में सवाल उठता है कि अगर ओवैसी पश्चिम बंगाल के चुनावी मैदान में नहीं हैं तो इसका फायदा किसे मिलेगा? क्या ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली राज्य की सत्ताधारी टीएमसी, ओवैसी के इस ऐलान के बाद अपने मुस्लिम वोट बैंक को इंटैक्ट रख पाएगी?

ओवैसी के बंगाल के सियासी मैदान में नहीं उतरने के बाद इस वक्त कई सवाल लोगों के जेहन में उठ रहे हैं. सवाल ये भी उठ रहा है कि क्या इससे कहीं बीजेपी को सियासी नुकसान तो नहीं होगा और ओवैसी ने ऐसा कदम आखिर क्यों उठाया? आइये इस बारे में आपको बताते हैं क्या सोचते हैं राजनीतिक विश्लेषक और बंगाल के चुनाव में करीबी नजर रखने वाले प्रदीप सिंह और अभय दूबे.

क्यों ने बंगाल चुनाव से ओवैसी को परहेज?

दरअसल, बंगाल चुनाव में ओवैसी के ना उतरने के सवाल के जवाब में एक तरफ जहां पॉलिटिकल एक्सपर्ट अभय दूबे बताते हैं कि इस चुनाव में ओवैसी की कोई भूमिका नहीं होगी. अगर ओवैसी चुनाव मैदान में उतरते तब भी बंगाल के मुस्लिम वोटर उनसे पास आने से परहेज करते. जबकि, प्रदीप सिंह का कहना है कि ओवैसी एक चतुर राजनीतिक खिलाड़ी है, जिन्हें यह अंदाजा लग गया है कि मुस्लिम वोट नहीं टूटेगा. उन्होंने कहा कि ओवैसी सिर्फ अपनी प्रजेंस दिखाने के लिए बंगाल चुनाव नहीं लड़ रहे हैं.

ओवैसी को इमेज की चिंता

प्रदीप सिंह बताते हैं कि बंगाल चुनाव में ओवैसी के चुनाव ना लड़ने की वजह ये भी है कि ओवैसी को बंगाल के मुस्लिम वोटर के छिटकने की उम्मीद थी. लेकिन, जब ओवैसी ने यह देखा कि मुस्लिम वोटर यहां पर नहीं टूटेगा उसके बाद उन्हें यहां से किनारा करना ही बेहतर समझा. इसके अलावा, ऐसा आरोप लगाया जाता कि बीजेपी की मदद करने उतरे हैं. छोटी पार्टियों पर इस तरह के आरोप लगते रहते हैं. लिहाजा, इस कदम से बीजेपी की बी टीम वाली इमेज भी हट जाएगी.

एक वजह ये भी है कि पश्चिम बंगाल में एआईएमआईएम संगठन में बड़ी भूमिका निभाने वाले ज़मीरुल हसन अब ओवैसी को छोड़कर खुद बंगाल में इंडियन नेशनल लीग का नया चैप्टर शुरू करने जा रहे हैं. इंडियन नेशनल लीग वही पार्टी है जो साल 1994 तक मुस्लिम लीग के साथ थी. सूत्रों की मानें तो एआईएमआईएम बंगाल के कई नेता अब्बास सिद्दीकी के साथ असदुद्दीन ओवैसी की दोस्ती से भी नाराज़ चल रहे थे. अब्बास सिद्दीकी की पार्टी इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) लेफ्ट और कांग्रेस के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ रही है. बंगाल में इंडियन नेशनल लीग की स्थापना हो रही है और माना जा रहा है कि ये पार्टी चुनाव में टीएमसी को ही समर्थन करेगी.

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