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Monday, March 1, 2021
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बिहार सरकार के नए कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम पर बवाल, DGP ने दी सफाई

नई दिल्ली: डीजीपी की कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम से जुड़ी नई चिट्ठी पर उठे बवाल के बीच बिहार के डीजीपी और आमिर सुबहानी ने आज मीडिया को संबोधित किया. पीसी में डीजीपी सिंघल ने कहा कि इस आंतरिक अधिसूचना से कॉन्ट्रैक्ट देने के सिस्टम को मजबूत किया गया है ताकि कोई असामाजिक तत्व कॉन्ट्रैक्ट हासिल न कर सके.

बिहार के गृह प्रधान सचिव आमिर सुबहानी ने कहा कि हाल के दिनों में बिहार सरकार के जरिए आदेश जारी किए गए हैं. 25 जनवरी को विभिन्न सरकारी निकायों में सरकारी काम या ठेका लेने वाले व्यक्ति को चरित्र प्रमाण पत्र लेना होगा. जो टेंडर लेंगे उन्हें पुलिस से सर्टिफिकेट लेना होगा. ये व्यवस्था पहले से थी लेकिन इसे दोहराया गया है. अगर किसी ने टेंडर लिया तो सब टेंडरिंग कर सकता है लेकिन सब टेंडर को भी चरित्र प्रमाण पत्र देना होगा. जो सिस्टम था उसे डीजीपी ने मजबूत किया है.

उन्होंने कहा कि बस स्टैंड का ठेका, नाव घाट, सब्जी मंडी सब ठेकेदारों को प्राइवेट आदमी यानी जिन्हें लगाया है उन्हें भी कैरेक्टर सर्टिफिकेट देना होगा. लोकतंत्र में सबको अपनी बात कहने का अधिकार है. इसमें कहीं से कोई शंका नहीं है. सिर्फ FIR में नाम आने से कोई अपराधी नहीं हो जाता है, लेकिन संज्ञेय अपराध, अपराध है. अगर कोई धरना प्रदर्शन में आपराधिक काम या विधि व्यवस्था के खिलाफ जाता है तो उस पर कार्रवाई होगी.

एडीजी जितेंद्र कुमार ने कहा कि इस संबंध में समय-समय पर क्षेत्रीय इकाइयों को कई निर्देश जारी किए गए थे. एक फरवरी को जारी किया गया निर्देश इसी सिलसिले में था, जिस पर भ्रम की स्थिति पैदा हुई. सरकार के आदेश में ‘गंभीर परिणामों’ की भी चेतावनी थी.

क्यों शुरू हुआ विवाद?

दरअसल, बिहार सरकार की तरफ से आदेश जारी किया गया जिसमें ये साफ संदेश दिया गया है कि सड़क जामकर विधि व्यवस्था के खिलाफ जाने वालों और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों को सरकारी नौकरी और सरकारी ठेके नहीं दिए जाएंगे. सरकार की तरफ से जारी आदेश के तहत, ‘यदि कोई व्यक्ति विधि-व्यवस्था की स्थिति, विरोध प्रदर्शन, सड़क जाम इत्यादि मामलों में संलिप्त होकर किसी आपराधिक कृत्य में शामिल होता है और उसे इस कार्य के लिए पुलिस के जरिए आरोप पत्रित किया जाता है तो उनके संबंध में चरित्र सत्यापन प्रतिवेदन में विशिष्ट एवं स्पष्ट रूप से प्रविष्टि की जाए. ऐसे व्यक्तियों को गंभीर परिणामों के लिए तैयार रहना होगा क्योंकि उनमें सरकारी नौकरी/सरकारी ठेके आदि नहीं मिल पाएंगे.’

इस आदेश पर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सरकार पर हमला करते हुए सोशल मीडिया पर कहा, ‘मुसोलिनी और हिटलर को चुनौती दे रहे नीतीश कुमार कहते हैं अगर किसी ने सत्ता व्यवस्था के विरुद्ध धरना-प्रदर्शन कर अपने लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग किया तो आपको नौकरी नहीं मिलेगी. मतलब नौकरी भी नहीं देंगे और विरोध भी प्रकट नहीं करने देंगे. बेचारे 40 सीट के मुख्यमंत्री कितने डर रहे हैं?’

रूपेश मामले पर डीजीपी ने क्या कहा?

रूपेश मामले में डीजीपी ने कहा कि पटना पुलिस ने बहुत कुछ बता दिया है. उसके अतिरिक्त हमारे पास कुछ भी बताने को नहीं है. उसमें हम लोग कुछ नहीं कहेंगे. हम लोग अदालत में साबित करेंगे कि जो पकड़ा गया वो दोषी है. रूपेश के परिवार की सीबीआई जांच की मांग हम तक नहीं पहुंची है. उम्मीद है अपने जांच से उन्हें भी संतुष्ट करूंगा.

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