वेदांता सिसोर्सेज ने कहा है कि उसने भारतीय पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड यानी BPCLमें सरकारी हिस्सेदारी खरीदने के लिए आवेदन दिया है. वेदांता के रिसोर्सेज के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने इस साल की शुरुआत में कहा था कि वह बीपीसीएल में सरकार की हिस्सेदारी खरीदने के विकल्पों का मूल्यांकन करेंगे. वेदांता के अलावा दो और कंपनियां भी BPCL में हिस्सेदारी खरीदने की होड़ में हैं.

सरकार के लिए राहत 

सरकार अपनी ऑयल मार्केटिंग और रिटेल कंपनी BPCLकी विनिवेश की प्रक्रिया दूसरे चरण में है. पहले चरण के तहत सरकार ने एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EoI) जारी किया था. लेकिन रिलायंस, अरामको समेत कई दिग्गज कंपनियों ने BPCL को खरीदने के लिए आवेदन नहीं किया. लेकिन अब वेदांता और दो विदेशी कंपनियों ने BPCLको खरीदने के लिए वित्त मंत्रालय के पास आवेदन दिया है. सरकार के लिए यह राहत की बात है, क्योंकि इस साल का उसका विनिवेश कार्यक्रम काफी हद तक इसकी बिक्री पर टिका है.माइनिंग क्षेत्र के दिग्गज वेदांता कंपनी के चेयरमैन अनिल अग्रवाल की भी ऑयल और गैस कारोबार में दिलचस्पी के देखते हुए, उन्हें BPCLके संभावित खरीदार के रूप में देखा जा रहा था. उन्होंने पिछले दिनों अपने कुछ इंटरव्यू में कहा था कि उनके मूल कारोबार और तेल के कारोबार में सिनर्जी हो सकती है.

ऑयल रिफाइनिंग मार्केट के 15 फीसदी से अधिक हिस्से पर कब्जा होगा 

फिलहाल जो भी कंपनी BPCLको खरीदेगी है उसका भारत के ऑयल रिफाइनिंग मार्केट के 15.33 फीसदी हिस्से पर कब्जा हो जाएगा. फ्यूल मार्केटिंग शेयर का 22% हिस्सा भी उसके पास चला जाएगा. BPCL का विनिवेश करके सरकार 2.1 लाख करोड़ के विनिवेश के लक्ष्य को पूरा करना चाहती है. अगर सरकार के 52.98% हिस्से को कोई कंपनी खरीदना चाहती है तो उसे लगभग 47,430 करोड़ रुपये चुकाने होंगे. इसके अलावा कंपनी को 26 फीसदी और स्टेक खरीदने के लिए 23,276 रुपये खर्च करके ओपन ऑफर लाना होगा.

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