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Tuesday, March 2, 2021
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IAS Success Story: न कोचिंग ली न किसी का गाइडेंस, अपनी मेहनत के बल पर निधि बनीं IAS ऑफिसर, जानिए उनकी सफलता की कहानी

Success Story Of IAS Topper Nidhi Siwach: निधि सिवाच ने साल 2018 में तीसरे प्रयास में यूपीएससी सीएसई परीक्षा न केवल पास की बल्कि 83वीं रैंक के साथ टॉप भी किया और अपने मन-पसंद पद आईएएस के लिए चुनी गईं. इसके पहले के दो प्रयासों में सेलेक्शन न होने का जिम्मेदार वे खुद को ही मानती हैं और अंततः अपने तीसरे प्रयास में पुराने अटेम्प्ट्स की गलितयों को सुधारते हुए उन्होंने सफलता हासिल की.

निधि की यूपीएससी जर्नी के साथ एक बड़ा मजेदार किस्सा भी जुड़ा हुआ है. दिल्ली नॉलेज ट्रैक को दिए इंटरव्यू में निधि बताती हैं कि जब वे तीसरी बार अटेम्प्ट देना चाह रही थी तो उन्हें परिवार की तरफ से इस शर्त के साथ परीक्षा देने दिया गया था कि वे परीक्षा की जिस भी स्टेज में फेल होंगी उन्हें वहीं अपना सफर खत्म करना होगा. उसके तुरंत बाद उनकी शादी कर दी जाएगी. यानी प्री में फेल हुईं तो वहीं से बाहर, मेन्स में हुईं तो वहां से. हालांकि इसकी नौबत नहीं आयी और निधि ने पूरी जान लगाकर तीसरे प्रयास को अंतिम साबित कर दिखाया.

निधि का बैकग्राउंड –

निधि मूल रूप से गुरुग्राम, हरियाणा की हैं. उनकी शुरुआती पढ़ाई भी यहीं हुई. निधि ने ग्रेजुएशन भी हरियाणा के एक कॉलेज से किया और मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री लेने के बाद हैदराबाद की एक कंपनी में जॉब करने लगीं. यहां उन्होंने दो साल काम किया पर उनका मन नहीं लगा. वे कुछ और करना चाहती थी और खासकर कुछ ऐसा जिससे देश के लिए कुछ करने की इच्छा पूरी हो. इस विचार के साथ निधि ने एएफसीएटी परीक्षा दी और लिखित परीक्षा पास कर ली. इसके बाद के दिए एसएसबी इंटरव्यू ने उनकी जिंदगी बदल दी. वहां इंटरव्युअर ने उनसे कहा कि उन्हें डिफेंस की जगह सिविल सर्विसेस चुननी चाहिए. बस यहीं से निधि को सिविल सर्विसेस का ख्याल आया और वे जुट गईं तैयारियों में.

यहां देखें निधि सिवाच द्वारा दिल्ली नॉलेज ट्रैक को दिया इंटरव्यू –

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जब दो बार हुईं असफल –

निधि ने जब पहला अटेम्पट दिया उस समय परीक्षा के बस तीन महीने बचे थे और वे सिलेबस भी खत्म नहीं कर पायी थीं. दूसरे अटेम्पट में भी उनकी तैयारी वो नहीं थी जैसी की इस परीक्षा के लिए होनी चाहिए. इस समय तक वे नौकरी भी कर रही थीं और उनके लिए पढ़ाई के लिए समय निकालना मुश्किल होता था. ये वो समय भी था जब घर वालों ने निधि से कहना शुरू कर दिया था कि करियर को बहुत वक्त दे दिया, अब शादी कर लो. घर की बड़ी संतान अगर लड़की हो तो यह प्रेशर कई बार और बढ़ जाता है.

निधि किसी भी हाल यूपीएससी के सपने को छोड़ना नहीं चाहती थीं. उन्होंने अपने पिता से एक और आखिरी मौके की गुज़ारिश की. इस बार वे नौकरी छोड़कर अपने घर आ गयीं और दिन रात मेहनत करने लगीं. उन्होंने यूपीएससी की तैयारी के लिए सेल्फ स्टडी का रास्ता अपनाया.

महीनों नहीं निकलीं कमरे से बाहर –

निधि के समर्पण का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि नौकरी छोड़कर यूपीएससी की तैयारी के मकसद से जब निधि ने घर में कदम रखा तो पहली बार 6 महीने के बाद उन्होंने अपने घर का मेन गेट देखा, वो भी प्री परीक्षा देने के लिए. निधि कहती हैं कि ऐसा नहीं है कि घर में पढ़ाई करने के दौरान डिस्ट्रैक्शंस नहीं होते. लेकिन किसी भी प्रकार के डिस्ट्रैक्शन से खुद को बचाना पड़ता है.

निधि की तैयारी के साथ गौर करने वाली एक और बात यह है कि वे यूपीएससी की तैयारी से जुड़े सारे मिथ तोड़ती हैं. न उन्होंने कभी कोचिंग ली, न किसी ग्रुप से जुड़ीं जो परीक्षा की तैयारी करवा रहे हों और न ही कभी कोई उनके परिवार से यूपीएससी तो छोड़ो सरकारी नौकरी में भी सेलेक्ट हुआ हो, जहां से उन्हें गाइडेंस मिल सके. इस प्रकार एक कैंडिडेट को जहां-जहां से मदद मिल सकती थी, वे सब रास्ते निधि के लिए बंद थे फिर भी उन्होंने न केवल यूपीएससी में सफलता पायी बल्कि अच्छी रैंक भी प्राप्त की.

निधि का अनुभव –

निधि कहती हैं घर में बंद रहने का मतलब यह कतई नहीं होता है कि आप बाहर की दुनिया के कांपटीशन से ही कट जाएं. ऑनलाइन सब सुविधाएं हैं, उनका इस्तेमाल करें और देखें की बाकी कैंडिडेट्स की भीड़ में आप कहा स्टैंड कर रहे हैं और आपकी तैयारियों का लेवल क्या है. निधि खूब मॉक टेस्ट देती थीं और खुद ही इंटरनेट पर मौजूद टॉपर्स के उत्तरों से उन्हें मैच भी करती थीं.

निधि का यूपीएससी के सफर के दौरान एक ही लक्ष्य था अपनी गलतियों से सीखना. वे बार-बार चेक करती थीं की कमी कहा है और उसे कैसे दूर करना है. वे कहती हैं यूपीएससी आपके बहुत से गुणों की परीक्षा लेता है जैसे पेशेंस, मेहनत, स्मार्ट वर्क, नॉलेज का इंप्लीमेनटेशन आदि. अगर सही दिशा में सही इरादे के साथ बढ़ेंगे तो भले देर से लेकिन सफलता जरूर मिलेगी.

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