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Thursday, February 25, 2021
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IAS Success Story: पहले ही प्रयास में मंदार बनें IAS ऑफिसर, बिना कोचिंग के सेल्फ स्टडी से पार किया UPSC का सफर

Success Story Of IAS Topper Mandar Jayantrao Patki: मंदार जयंतराव पत्की महाराष्ट्र के एक छोटे से गांव के हैं. यूपीएससी के क्षेत्र में किस्मत आजमाने के पहले मंदार ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया है साथ ही ग्रेजुएशन कि डिग्री भी ली है. यानी आईएएस बनने के पहले मंदार इंजीनियरिंग कर चुके हैं. ग्रेजुएशन के तुरंत बाद मंदार ने यूपीएससी परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी थी और सही प्लानिंग एवं स्ट्रेटजी के दम पर पहली ही बार में न केवल परीक्षा पास की बल्कि ऑल इंडिया रैंक 22 भी लाए. मंदार ने परीक्षा पास करने के टिप्स के साथ ही एग्जाम को लेकर फैली बहुत सी गलत धारणाओं को लेकर दिल्ली नॉलेज ट्रैक को दिए इंटरव्यू में बात की.

इन बातों पर न दें ध्यान –

मंदार सबसे पहले यूपीएससी परीक्षा को लेकर फैले मिथ्स क्लियर करते हैं. वे कहते हैं कि अक्सर कैंडिडेट्स के मन में आता है कि अगर उनका एजुकेशनल बैकग्राउंड अच्छा नहीं रहा है या वे साइंस के स्टूडेंट नहीं रहे हैं तो उन्हें परीक्षा में सफलता हासिल करने में परेशानी होगी. लेकिन सच यह नहीं है. यूपीएससी को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप किस बैकग्राउंड के हैं या आपने कोचिंग लेकर पढ़ाई की है या बिना कोचिंग के. अगर आप जरूरत भर की मेहनत करने के लिए तैयार हैं तो आपका सेलेक्शन जरूर होगा. यह समझिए न कि जो एग्जामिनर आपकी कॉपी चेक करता है वह केवल उत्तर लिखता है, यह नहीं देख सकता कि आपका क्या बैकग्राउंड है न इस बेस पर अंक देता है. इसलिए फालतू चिंताएं छोड़कर खूब मेहनत से पढ़ें. बस यही एग्जाम में सफलता दिलाएगी.

यहां देखें मंदार पत्की द्वारा दिल्ली नॉलेज ट्रैक को दिया गया इंटरव्यू – 

प्लान बनाकर करें पढ़ाई –

मंदार आगे कहते हैं कि वे प्लान बनाकर पढ़ाई करने में यकीन करते हैं. उनके पास हर छोटी-बड़ी योजना लिखित में होती थी. इनको वे मिनी और माइक्रो नाम देते हैं. वे कहते हैं मिनी मतलब वे प्लान जो कल के या परसों के हैं और माइक्रो मतलब वे प्लान जो एक या दो महीने के बाद के हैं. इससे वे क्लियर रहते थे कि उन्हें किस दिन तक कौन सा विषय खत्म करना है और उसे कितनी बार रिवाइज करना है. एक स्ट्रेटजी बनाकर आगे बढ़ना तब और आसान हो जाता है जब आपके पास पूरा टाइम-टेबल हो. इससे कुछ छूटता भी नहीं है और समय के अंदर सिलेबस, रिवीजन, आंसर राइटिंग सब पूरी हो जाती है. प्लानिंग के साथ ही सही स्ट्रेटजी भी बनाएं जो आपकी क्षमताओं और जरूरत पर आधारित होनी चाहिए. सलाह सभी से लें लेकिन करें अपने मन की.

कम किताबों को करें बार-बार रिवाइज –

मंदार मेन्स के लिए सीमित किताबें रखने और खूब आंसर राइटिंग प्रैक्टिस करने पर जोर देते हैं. वे कहते हैं कि किताबें सीमित होंगी तभी बार-बार रिवीजन हो पाएगा इसलिए कम सोर्स रखें और कभी कहीं कोई विषय न मिले तो ऑनलाइन उसे तलाश लें, उसके लिए अलग से किताब न खरीदें. वे आगे कहते हैं जब तक सही से आंसर लिखना नहीं आएगा तब तक किताबी ज्ञान का कोई फायदा नहीं. मंदार नोट्स भी बनाते थे जो बाद में आसानी से रिवाइज किए जा सकें. वे सलाह देते हैं कि संभव हो तो आप भी नोट्स बनाएं, इनसे राइटिंग प्रैक्टिस भी होती है.

अगली जरूरी बात है मॉक टेस्ट देना और उन्हें एनालाइज करना. जैसे मंदार जब पेपर देते थे तो जिस हिस्से में कम अंक आते थे उसे अलग से समय देकर तैयार करते थे.

मंदार का अनुभव –

मंदार ऐस्से और एथिक्स दोनों पेपरों पर भरपूर ध्यान देने की सलाह देते हैं. उनका मानना है कि इन पेपरों से रैंक अच्छी बनती है. मंदार ने ऐस्से के लिए मॉडल टेस्ट पेपर सॉल्व किए थे. अंत में बस यही कि सबकुछ प्लान करके चलिए ताकि बिल्कुल समय बर्बाद न हो. एक बात का ध्यान रखिए कि एग्जाम में सफल होते हैं तो अच्छा है लेकिन सफल नहीं भी होते तो कोई बात नहीं क्योंकि यह परीक्षा लार्जर देन लाइफ नहीं है. अपनी तरफ से पूरा प्रयास करिए पर इसका बहुत स्ट्रेस लेने की जरूरत नहीं है. परीक्षा को लेकर बहुत सी भ्रांतियां हैं जिन पर यूं ही भरोसा न करें पहले खुद सबकुछ टेस्ट कर लें. केवल एक बात दिमाग में रखें कि जो इस एग्जाम को पास करने के लिए मेहनत करने का हौसला रखता है वह सफल भी जरूर होता है. फिर चाहे वह किसी भी बैकग्राउंड का हो या किसी भी स्ट्रीम का.

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