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Friday, February 26, 2021
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IAS Success Story: पहले IPS और फिर IAS, चार प्रयासों में पूरा किया सौम्या ने UPSC का सफर

Success Story Of IAS Topper Saumya Gururani: साल 2018 की टॉपर सौम्या गुरुरानी एक बहुत ही छोटी जगह अल्मोड़ा से हैं. उनकी यूपीएससी जर्नी काफी उतार-चढ़ाव भरी रही लेकिन अपनी बात कहते वक्त सौम्या बहुत सहज लगती हैं. जो साल उन्होंने इस परीक्षा की तैयारी में दिए उन्हें वे इनवेस्टमेंट मानती हैं जिनकी बदौलत उनमें बहुत सारे सकारात्मक बदलाव हुए. सौम्या का मानना है कि यह जर्नी आपको निखारती है, परिपक्व बनाती है इसलिए सफलता मिलने में समय लगे तो परेशान न हों बल्कि इसे खुशी से स्वीकारें. दिल्ली नॉलेज ट्रैक को दिए इंटरव्यू में सौम्या ने अपने इस सफर के अनुभव साझा किए.

सौम्या का यूपीएससी सफर –

सौम्या की शुरुआती पढ़ाई-लिखाई अल्मोड़ा में ही हुई और बाद में इंजीनियरिंग करने वे रुड़की चली गईं. यहां से ग्रेजुएशन करने के बाद उन्हें कैम्पस प्लेसमेंट में बढ़िया नौकरी भी मिल गई. चूंकि सौम्या हमेशा से एक ब्राइट स्टूडेंट थी इसलिए उनकी फैमिली को लगता था कि उन्हें यूपीएससी परीक्षा जरूर देनी चाहिए. इसके साथ ही सौम्या खुद भी सारी उम्र कंप्यूटर के सामने बैठकर काम करने के लिए खुद को तैयार नहीं कर पा रही थी. इन दोनों कारणों से सौम्या के मन में भी यूपीएससी देने का विचार प्रबल होता गया. आखिरकार सौम्या ने अपने दिल की सुनी और यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी. पहली बार उन्होंने कोचिंग लेकर तैयारी की लेकिन बाद के प्रयास सेल्फ स्टडी से ही दिए.

पहले प्रयास में सौम्या मेन्स तक पहुंची लेकिन आगे नहीं बढ़ पाई. दूसरे प्रयास में उनका प्री भी क्लियर नहीं हुआ. तीसरे में सौम्या ने तीनों स्टेजेस पार की और रैंक के अनुसार आईपीएस पद के लिए सेलेक्ट हो गईं. ज्वॉइन करने के बावजूद सौम्या ने तैयारी नहीं छोड़ी और अंततः चौथे अटेम्प्ट में साल 2018 में 30वीं रैंक के साथ सेलेक्ट हुईं. इससे उन्हें उनका मनचाहा आईएएस पद भी मिला.

यहां देखें सौम्या गुरुरानी द्वारा दिल्ली नॉलेज ट्रैक को दिया गया इंटरव्यू – 


क्या कहता है सौम्या का अनुभव –

सौम्या कहती हैं कि यहां सफलता आसानी से नहीं मिलती. कई बार समय लगता है और कई बार बहुत समय लगता है लेकिन धैर्य न खोएं. यही नहीं इन असफलताओं को सीख के तौर पर लें. इस सफर में मिलने वाले फेलियर आपको परिपक्व बनाते हैं और आपके व्यक्तित्व को निखारते हैं. जब असफलताएं मिलें तो डरकर कदम पीछे न करें बल्कि इनसे मिले अनुभव को जीवन पर लागू करें. देखें क्या कमी रह गयी थी, उसे अगली बार न दोहराएं.

सौम्या उन महिलाओं के लिए भी बड़ा उदाहरण हैं जिन्हें लगता है कि शादी के बाद करियर खत्म हो जाता है या संभावनाएं कम हो जाती हैं. उन्होंने चौथा प्रयास शादी के बाद ही दिया जिसमें वे टॉपर बनीं. वे कहती हैं कि अगर इरादे मजबूत हों और नियत साफ तो चाहे आप शादी-शुदा हों, नौकरीपेशा हों या आपके बच्चे हों, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता. इंसान चाहता है तो अपनी प्रायॉरिटी के हिसाब से समय निकाल ही लेता है. अगर फैमिली सपोर्टिव है तो कोई दिक्कत नहीं आती. परिवार और दोस्तों के सहयोग से आप सकारात्मक महसूस करेंगे और मोटिवेट भी होंगे. इसलिए ऐसे लोगों के टच में रहें. तैयारी के नाम पर खुद को सबसे अलग न कर दें क्योंकि आप एक इंसान हैं और आपकी इमोशनल नीड्स भी हैं.

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