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Sunday, February 28, 2021
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IAS Success Story: हिंदी माध्यम के रवि कभी करते थे पिता के साथ खेती, आज हैं UPSC टॉपर

Success Story Of IAS Topper Ravi Kumar Sihag: यूपीएससी सीएसई परीक्षा पास करने की जब बात आती है तो कैंडिडेट्स अक्सर कई तरह के सवाल उठाते हैं और कई विषयों को लेकर चिंतित दिखते हैं. जैसे उनका बैकग्राउंड हंबल है, उनका एजुकेशनल रिकॉर्ड ठीक नहीं, उनके पढ़ाई का माध्यम हिंदी है वगैरह. रवि ये सब और ऐसे बहुत से प्रश्नों का जीता-जागता जवाब हैं. उन्होंने एक बहुत ही साधारण किसान परिवार से और हिंदी मीडियम का स्टूडेंट होने के बावजूद अपने पहले ही प्रयास में यूपीएससी सीएसई परीक्षा पास की. रवि को देखकर साफ पता चलता है कि एक एवरेज स्टूडेंट जिसकी स्कूलिंग बहुत ही साधारण जगह से हुई हो या जिसके परिवार में कोई इस फील्ड में न रहा हो, वह भी अगर ठान ले और मेहनत करे तो सफल हो सकता है. दिल्ली नॉलेज ट्रैक को दिए इंटरव्यू में रवि ने यूपीएससी परीक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर खुलकर चर्चा की.

कैसे आया यूपीएससी का ख्याल –

रवि बताते हैं कि वे अपने पिता के साथ बचपन से ही खेती-किसानी का काम देखते थे. बीए तक उन्होंने खेती से जुड़े हर काम की जिम्मेदारी संभाली है. ऐसे में जब गांव में खेतों को लेकर, सिंचाई को लेकर या इससे संबंधित किसी भी एरिया में समस्या आती थी तो कहा जाता था कलेक्ट्रेट ऑफिस जाओ. हर परेशानी का समाधान वहीं होता था. तब से वे सोचते थे कि आखिर कलेक्टर होता कौन है जिसके पास हर छोटी-बड़ी समस्या का समाधान होता है. इसके अलावा गांव में अक्सर लोग कहते थे कि तुम कौन सा कलेक्टर हो जो ये काम कर लोगे, ये परेशानी दूर कर दोगे वगैरह. ऐसी बातें सुनकर ही रवि का इस क्षेत्र के प्रति आकर्षण पैदा हुआ. तभी बीए के बाद उन्होंने इस क्षेत्र में किस्मत आजमाने का फैसला किया ताकि लोगों की समस्या का समाधान आसानी से कर सकें.

दिल्ली नॉलेज ट्रैक को दिए इंटरव्यू में रवि ने विस्तार से बात की –

एनसीईआरटी से किया बेस मजबूत –

रवि कहते हैं कि यूपीएससी का सिलेबस ठीक से देखने और समझने के बाद उन्होंने बेसिक बुक्स से शुरुआत की. अपने इस सफर में सबसे खास साथी वे एनसीईआरटी की किताबों को मानते हैं. रवि कहते हैं कि यूपीएससी परीक्षा एक पूरा पैकेज होती है जो प्री से लेकर पर्सेनेलिटी टेस्ट तक आपको हर प्रकार से टेस्ट करती है. पहले आप यह ठीक से समझ लें कि आखिर यह एग्जाम आपसे चाहता क्या है उसके बाद मैदान में उतरें.

बुक लिस्ट की जहां तक बात है तो यह ज्यादातर स्टूडेंट्स के लिए सेम ही होती है बस ख्याल इस बात का रखना है कि कम से कम किताबें इकट्ठी करें और उनसे बार-बार पढ़ें. लिमिटेड रिसोर्स, मैक्सिमम रिवीजन पॉलिसी को फॉलो करें. ये मानकर चलें कि किताब में लिखा एक-एक शब्द आपको पता होना चाहिए इतनी बार रिवीजन हो जाए.

हिंदी माध्यम से नहीं पड़ा कोई फर्क –

रवि कहते हैं कि कैंडिडेट्स अक्सर हिंदी माध्यम को लेकर कांफिडेंट फील नहीं करते जबकि ऐसा नहीं है. आपका माध्यम क्या है इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता. उनका माध्यम तो हिंदी था ही साथ ही ऑप्शनल भी हिंदी लिटरेचर था. इसके बावजूद उन्होंने न केवल परीक्षा पास की बल्कि ऑप्शनल में बहुत बढ़िया अंक भी पाए. नतीजा यह हुआ कि वे साल 2018 के हिंदी मीडियम के टॉपर बने.

वे दूसरे कैंडिडेट्स को भी यही सलाह देते हैं कि इन फालतू चीजों में समय न गंवाएं कि आपका माध्यम क्या है या आप पहले पढ़ाई में अच्छे नहीं थे. इस एनर्जी को परीक्षा की तैयारी में लगाएं तो ज्यादा लाभ मिलेगा. किसी इंग्लिश मीडियम कैंडिडेट को सफलता पाने के लिए जितने पापड़ बेलने पड़ते हैं उतने ही आपको भी बेलने होंगे. माध्यम कभी इसमें रुकावट नहीं बनता.

अंग्रेजी भी है जरूरी –

रवि आगे कहते हैं कि हिंदी मीडियम चुनना और उससे परीक्षा देना ठीक है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आपको इंग्लिश नहीं सीखनी होगी. इस परीक्षा में सफलता हासिल करने और आगे काम-काज देखने के लिए इंग्लिश एक मुख्य जरूरत है. इसलिए इसे इग्नोर न करें और न ही यह सोचें कि आप हिंदी मीडियम के हैं तो अंग्रेजी सीखने की आपको कोई आवश्यकता नहीं.

अंत में बस इतना ही कि इस परीक्षा को लेकर कैंडिडेट्स के मन में कई प्रकार की भ्रांतियां है उनमें से एक है कि यह परीक्षा बहुत कठिन है और इसे आसानी से पास नहीं किया जा सकता. रवि कहते हैं कि सभी का अपना सोचना होता है पर उन्हें ऐसा लगता है कि यह परीक्षा पास करना इतना भी कठिन नहीं. सही अपरोच के साथ सही दिशा में बढ़ने और कड़ी मेहनत के साथ कोई भी इस परीक्षा को पास कर सकता है. रवि कहते हैं कि अगर मैं कर सकता हूं तो कोई भी कर सकता है.

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